लेकिन मोदी सरकार ने पिछले 3 सालों में 1200 पुराने और व्यर्थ कानून खत्म कर दिए। इनमें से करीब 2 दर्जन कानून ऐसे थे जो ब्रिटिश राज में लागू किए गए थे।
अगर आप इन कानूनों के बारे में सुनेंगे तो आप वाकई हैरान रह जाएंगे कि क्या यह कानून सच में 21वीं सदी में भारत में विद्यमान थे।
यह अजीब कानून काफी सालों से चले आ रहे थे, आजादी से भी पहले से मौजूद इन कानूनों का आज के समय में कोई महत्व नहीं था। यदि आप इन कानूनों के बारे में जानेंगे तो आपको हंसी ज़रूर आएगी। इनमें से कई कानून हटा दिए गए हैं और कई अभी बाकी है।
यह है वो अजब कानून
1. एक कानून के अनुसार गंगा जी में चलने वाले बोट का टोल टैक्स दो आने से ज्यादा नहीं हो सकता। अब जहां हजार के नोट बंद हो चुके हैं, वहां इन आनों को कहा ढूंढेंगे। ज्यादातर लोगों को तो यह भी नहीं पता होगा कि यह आना होता क्या है ।
2. एक 200 साल पुराने कानून के मुताबिक ब्रिटेन के सम्राट को यह अधिकार था कि वो भारत की सभी अदालतों के फैसलों की समीक्षा कर सकता है। देश के आजाद होने के कई साल बाद भी इस कानून का होना अजीब लगता है। हैरानी इस बात की है कि यह कानून आज भी मौजूद क्यों था। हमारी गुलामी के प्रतीक इस कानून को अब हटा दिया गया है।
3. क्या आपने कभी पतंग उड़ाने के लिए सरकार से अनुमति ली है? नहीं? तो जनाब इंडियन एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 के तहत एयरक्राफ्ट के दायरे में पतंगें भी आती हैं, जी हां, और इनको उड़ाने के लिए भी वैसे ही परमिट लेना होगा, जैसे एयरक्राफ्ट को उड़ाने के लिए लिया जाता है। हालांकि यह कानून बहुत पुराना है और आज यह प्रासंगिक नहीं है या फिर इसकी कोई परवाह नहीं करता। इस कानून का तो खत्म होना ही बेहतर है।
4. ऐसा ही एक और कानून है। ये है इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878 के तहत, इसमें अगर आपको दस रुपये से ज्यादा की कीमत की कोई भी चीज मिलती है, तो आपको इसके बारे में राजस्व अधिकारी को सूचना देनी होगी। और यदि आप इसके बारे में राजस्व अधिकारी को सूचना नहीं देते हैं, तो आपको जेल जाना पड़ सकता है। अब जरा कल्पना कीजिए आप को रास्ते में सो रुपए का नोट मिले और आप उसके बारे में राजस्व अधिकारी को नहीं बताते हैं तो क्या होगा।
5. एक और बेहद हास्यास्पद क़ानून है इसके तहत अगर आपकी गाय ने का बछड़ा दिया है तो वो बैल बनेगा या सांड, यह भी सरकार तय करेगी। और इसके लिए बाकायदा एक सरकारी प्रक्रिया है। क्या आपको इस कानून की जानकारी थी।
6. अंग्रेजों के जमाने का एक और कानून है, व्हीकल एक्ट 1914 के तहत, इसके अनुसार आंध्र प्रदेश में एक इंस्पेक्टर के दांत बिल्कुल दूध की तरह चमकते होने चाहिए लेकिन उसे अयोग्य घोषित करने की कुछ अनोखी शर्तें हैं। यदि सिकुड़ी हुई छाती, सटे हुए घुटने और हथौड़े जैसे पंजे हुए तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह कानून आजकल चलता तो नहीं है लेकिन कानून की किताब में मौजूद जरूर है।
7. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय का एक और कानून है, जो आज के समय में बिल्कुल बेकार है। इसके अनुसार कुछ राज्यों के पुलिसकर्मियों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि आकाश से गिराए गए पैम्फलेट उनके इलाके में न गिरें. ध्यान रहे द्वितीय विश्वयुद्ध के समय कैंपेनिंग के लिए हवाई जहाज से पैम्फलेट गिराए जाते थे। यदि आप अपने काम को बढ़ाने के लिए छपाए गए पर्चे हवा में उछाल कर, या छत से गिराते हैं तो जरा सावधान रहिएगा। क्योंकि हो सकता है आप भी इस कानून के दायरे में आते हों।
वैसे तो अभी सिर्फ 12 सौ कानून ही हटाए गए हैं लेकिन पुनर्विचार के लिए 1824 कानूनों की पहचान की गई है। यह सारा श्रेय केवल मोदी सरकार को ही नहीं जाता बल्कि इसमें ऊपरी सदन ने भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई है, जिसमें कि विपक्ष का बहुमत है। और 1,159 कानूनों पर पुर्नविचार करने से जुड़े बिल को पास भी कर दिया गया है। अब देखना यह है कि बाकी के कानूनों को हटाने में कितना समय लगता है।


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