'वरम कलई' दक्षिण के तमिलनाडु क्षेत्र में पली विश्व की सर्वाधिक प्राचीन तथा घातक युद्ध कलाओं में से एक मानी जाती है. इसका दूसरा नाम है 'मर्म अदि' है. 'वरम कलई' का शाब्दिक अर्थ है... मर्म केन्द्रों की कला. इस कला में शरीर के विभिन्न मर्म केन्द्रों पर सुनिश्चित दबाव या स्पर्श से व्यक्ति को स्वस्थ किया जा सकता है या उन्हीं मर्म केन्द्रों पर प्रहार करके व्यक्ति को निष्क्रिय या अपाहिज किया जा सकता है या उसकी जान भी ली जा सकती है. यही कारण है कि यह कला सभी को नहीं सिखाई जाती. 'वरम कलई' की कला मात्र चुनिन्दा शिष्यों को ही सिखाई जाती है. इसके भी कुछ नियम हैं. यदि शिष्य के पास उचित ग्यान, अनुभव एवं समझ है, तथा विचारों में परिपक्वता है, यदि गुरू को विश्वास हो कि शिष्य इस कला का दुरपयोग नहीं करेगा, तभी वह इस 'वरम कलई' की कला उसे सिखाता है. कालान्तर में इस कला का दुरपयोग होने के कारण गुरूओं ने सम्पूर्ण कला एक ही शिष्य को सिखाना बन्द कर दिया. आज युवावर्ग सबकुछ जल्दी सीखना चाहता है. लेकिन इस कला को सीखने के लिए अच्छा खासा वक्त लगता है इसलिए लोग इसे कम सीख रहे हैं, और यह कला धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही है.


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