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युद्ध कलाएं एवं शारीरिक विकास

युद्ध कलाएं एवं शारीरिक विकास
Martial Arts and Physical Development

युद्ध कलाओं का अभ्यास करने वाले अपने शरीर को इतना मज़बूत बना लेते हैं की अपने एक ही सधे  हुए वार से पत्थर की सिल्लियाँ तक तोड़ डालते हैं. ज्यादा अभ्यास करने की कारन इनके शरीर में आने वाले परिवर्तन इन्हें इसके लिए मदद करते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है की हमारे शरीर की हड्डियाँ कंक्रीट से ४० गुना ज्यादा मज़बूत होती हैं. लेकिन पत्थर की सिल्ली टूटने की मात्र यही एक वजह ही नहीं होती. बल्कि कई तकनिकी कारणों के अलावा एक कारण है मार्शल आर्टिस्ट के हाथ की ४६ फीट/ सेकंड से अधिक तेज़ गति. जबकि आम आदमी अपना हाथ २० फीट/ सेकिंड से अधिक तेज़ नहीं घुमा पता. उत्तम शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है बेहतर रक्त संचार एवं नियमित व्यायाम.

मार्शल आर्ट्स के अभ्यास से शरीर की सभी मांसपेशियां हारकर में आती हैं. सभी अंगों का व्यायाम होता है. रक्त संचार सुचारू रूप से होता है. गुर्दा, अमाशय, फेफड़े, आंतें एवं हृदय आदि सही ढंग से कायर करते हैं, इससे शरीर का सम्पूर्ण विकाक निश्चित हो जाता है. मार्शल आर्ट्स के सभी व्यायाम शरीर के सभी अंगों पैर बारी बारी से असर डालते हैं. औरी शरीर स्वस्थ रहता है, और यदि तन स्वस्थ होगा तो मन भी स्वस्थ होगा और सफलता आपके करीब आती चली जाएगी.

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