चीन में कुंग फू कि आधारशिला रखने वाला बोद्ध भिक्षुक भोधिधर्म पल्लव वंश के राजा सुगंवास का पुत्र था.
इस सत्य को सारा विश्व जानता है, मात्र हम ही अनभिज्ञ हैं,
ऐसा क्यों है ?
मानसिक रूप से हम आज भी गुलाम प्रतीत होते हैं. तभी तो अंग्रेजी बोलने वाले का सत्कार हम ऐसे करते हैं जैसे वो चाँद से उतरा हो. पहले भी अंग्रेज ही राज करते थे आज भी अंग्रेज ही राज करते हैं. पहले भी राज करने वालों के लिए देश हित से बढकर अपना हित था. आज भी वैसा ही है. तभी तो हम अपने देश की युद्ध्कलायों को भूल ही चुके हैं. कल्लारिपयाट्टू, सीलमबम, कुट्टू वरिसायी, थोडा, थांग ता, गतका सब धीरे धीरे ख़तम हो रहा है. यदि कही बचा भी है तो आम जनता उससे पूरणतया अनजान है. हमारा ही योग..., YOGA बनकर हमारे ही पास लौट आया है. फर्क सिर्फ इतना है की पहले भारत दुनिया को योग सिखाता था, और अब... दुनिया भारत को योग सिखा रही है. हमारा ही आयुर्वेद आज हमारे लिए ही बचाना मुश्किल हो रहा है जबकि आयुर्वेद, एलोपैथी से ज्यादा कारगर है. जागो इससे पहले की देर हो जाये. अपनी विरासत को संभालो. अपनी विरासत को बचाओ. और अपने आप में विश्वास करो. विश्वास करो की हम पहले भी विश्वा का नेतृत्व करने की कूवत रकते थे हम आज भी दुनिया का मार्गदर्शन करने की योग्यता रखते हैं.
अपने आप को पहचानो.


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