अगर हम आपसे, हू-हा करते, उछल-उछल कर लड़ते दो लोगों के बारे में सोचने को कहें तो आपकी कल्पना चीनी फिल्मों की और ही जाएगी। और अगर मार्शल आर्ट्स के विषय में बात करें तो आप के दिमाग में जो नाम सबसे पहले आएगा वो है कुंग-फू। बहुत सारी फिल्में और सूचना प्रद लेख आने के बावजूद लोगों को यह नहीं पता की भारत का एक अपना मार्शल आर्ट है, भारत की अपनी युद्ध कला है। या फिर शायद सैंकड़ों सालों तक ग़ुलाम रह चुके भारतीय इस सत्य पर विश्वास नहीं कर पा रहे कि भारत कभी किसी क्षेत्र में दुनिया से आगे था।
- चीन में कुंग-फू (Kung-Fu) की शुरुआत करने वाले भारतीय बौद्ध भिक्षुक बोधिधर्म की चीन में पूजा होती है। लेकिन अधिकतर भारतीय उसका नाम तक नहीं जानते।
- महाभारत काल में हुए भीम पुत्र बर्बरीक ने एक ही तीर से पूरे वृक्ष के पत्तों में छेद कर दिए थे। हरियाणा राज्य के हिसार ज़िले में स्थित इस पेड़ के पत्तों में आज भी छेद हैं, किन्तु अधिकतर भारतियों के लिए यह मात्र एक भ्रम है, एक ऐसी दंतकथा है जिसका कोई प्रमाण नहीं है।
वेदों के एक उपभाग धनुर्वेद में धनुर्विद्या (धनुष-बाण चलाने का ज्ञान) की विस्तार से विवरण है। शस्त्रशास्त्र, अग्निपुराण, विष्णुपुराण में भी इस तरह की विद्या के विषय में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि लौह युग और ताम्र युग के पश्चात ही वैदिक युग का आरम्भ हुआ था। और इसी युग में वेदों की रचना हुयी थी। अब तक का सबसे पुराना पाया गया साहित्य, वेद १७०० ईस्वी पूर्व से ११०० ईस्वी पूर्व माना गया है।
चौथी शताब्दी में शल्य चिकित्सा में निपुण महर्षि सुश्रुत नें अपनी पुस्तक सुश्रुत संहिता में शरीर में पाये जाने वाले १०७ मर्म स्थानों की चर्चा की है। इन मर्म स्थानो पर प्रहार करने पर जान जा सकती है तथा इन्हीं मर्म स्थानों पर विशेष प्रकार से दबाव, मर्दन (मालिश) या अन्य विधियों द्वारा प्रभवित कर रोग निवारण भी किया जा सकता है। शरीर के मर्म स्थानों के इस ज्ञान को मर्म कला, मर्म चिकित्सा या मर्म अदि भी कहा जाता है। यह मर्म कला आजकल दक्षिण भारतीय युद्ध कला 'कलरिपयट्टु' में सिखाई जाती है।
Indian Ancient Martial Arts: An Introduction


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