अदिथाडा : एक प्राचीन भारतीय युद्ध कला
प्राचीन भारतीय युद्ध कलाओं में जिन युद्ध कलाओं का नाम विशेष तौर पर लिया जाता है, उनमेँ से एक नाम है अदिथाडा (Adithada). 2000 साल पहले खोजी गई यह युद्ध कला आजकल दक्षिणी केरल, कन्याकुमारी तथा उत्तरी श्रीलंका मेँ प्रचलित है। अदि का अर्थ है प्रहार करना तथा थोडा का अर्थ है रोकना। अदिथाडा में अपने प्रतिद्वंदी को हाथों और पैरों से जकड़ना, उससे जूझना और प्रहार करना भी शामिल है। साथ ही इस शैली में मर्म स्थानों का अध्ययन भी किया जाता है। इस शैली में 9 अंगों का प्रयोग किया जाता है।
प्राचीन भारतीय युद्ध कलाओं की सूची में यह मात्र एक ऐसी शैली है जिसमें नौ अंगों का प्रयोग किया जाता है . इसमें हाथों, कुहनियों, पैरों, घुटनों और सिर का प्रयोग किया जाता है . अदिथाडा में मुए थाई (Muay Thai), कराटे (Karate) और किक बॉक्सिंग (Kick Boxing) के तत्व भी शामिल हैं . इसीलिए इस कला को भारतीय किक बॉक्सिंग (Indian Kick Boxing) भी कहा दाता है .
अदिथाडा को केरल की विश्व प्रसिद्ध युद्ध कला कल्लरीपयट्टु (Kalaripayattu) का ही एक भाग कहा जा सकता है। केरल में दो प्रकार के कल्लरीपयट्टु का प्रचलन है, उत्तरी कल्लरीपयट्टु (Northern Kallaripayattu) तथा दक्षिणी कल्लरीपयट्टु (Southern Kallaripayattu) दक्षिणी कल्लरीपयट्टु के प्रारम्भिक अभ्यास में, यानि कल्लरीपयट्टु सीखने से पहले, उसकी तैयारी के लिए खाली हाथों से लड़ने की जो शैली सिखाई जाती है वही अदिथाडा है। अदिथाडा अपने नाम की तरह साधारण नहीं है, बल्कि इसमें निपुण होने में सालों लग जाते हैं . अदिथाडा में निपुण होने के पश्चात ही दक्षिणी कल्लरीपयट्टु के अन्तर्गत शस्त्र विद्या का प्रशिक्षण दिया जाता है। 2000 हज़ार साल पुरानी यह भारतीय युद्ध कला अपनी विशेषताओं के कारण आज भी प्रासंगिक है।
Adithada: an Indian Ancient Martial Art


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