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एक साक्षात्कार: रेकी ग्रैण्ड मास्टर मन्नत राजपूत के साथ

एक साक्षात्कार: रेकी ग्रैण्ड मास्टर मन्नत राजपूत के साथ

'रेकी' (Reiki) मेरे लिए हमेशा से एक रहस्य (Mystery) रहा है, और शायद औरों के लिए भी. 
मैं हमेशा ये समझने की कोशिश करता रहा की आखिर लोग किसी को सिर्फ छू कर कैसे ठीक कर सकते हैं. और यही जानने के लिए आज मैं मिलने जा रहा था, रेकी ग्रैंडमास्टर मन्नत राजपूत (Reiki Grandmaster Mannat Rajput) से. उनका पता तो मेरे पास था ही. पहुँचने का वक्त था दोपहर १२ बजे.
धत्त तेरे की... लेकिन मैं तो घर से ही २-३० बजे के करीब निकला था. सब लेखक आलसी होते हैं क्या? खैर... जनकपुरी ईस्ट मेट्रो स्टेशन, पर उतरने के बाद उनका घर ढूंढना मुश्किल नहीं था .
मुस्कराते हुए उन्होंने मेरा स्वागत किया, एक साफ़-सुथरे कमरे में जहाँ हर चीज़ बड़े सलीके से रखी थी, मुझे बिठाया गया, मेज पर पानी से भरे कांच के गोल बर्तन में तैरते एक प्यारे से फूल ने मेरा मन मोह लिया.
पहले पानी और फिर चाय, मेरे मनपसंद बिस्किट, बादाम और नमकीन से संपन्न एक ट्रे मेरे सामने रख दी गयी. मुझे लगा था की कोई अधेड़ उम्र की महिला होगी जो रेकी की ग्रैंडमास्टर होंगी. लेकिन मेरी उम्मीद के बिलकुल उलट निकली, २८ वर्षीय मन्नत. उनका तजुर्बा..., उनका रेकी और जीवन को लेकर  उनका अनुभव... उनकी उम्र से बहुत ज्यादा था. पहले रेकी के विषय में कुछ समय तक हलकी फुल्की बात चली और फिर..., चर्चा और गहरी होती चली गयी, मेरा हर सवाल मेरी जिज्ञासा शांत करने की एक कोशिश था.
कृष्णा: चिकित्सक (Doctors) तो अपने मरीज़ की ढेरों रिपोर्ट्स चेक करते हैं तब उन्हें पता चलता है की मरीज़ को क्या समस्या है, आपको कैसे पता चलता है?
मन्नत: हमारे सामने जब पेशंट आता है तो उसे देख कर ही हमें पता चल जाता है की उसे क्या समस्या (Problem) है लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि हम मरीज़ को बता नहीं सकते कि उसे क्या-क्या समस्याएं हैं. तो हम उसे बताते नहीं हैं बस सीधा उसका इलाज शुरू कर देते हैं, सबसे पहले हम ये देखते हैं कि उसकी समस्या क्या है. उसकी समस्या के हिसाब से हीलिंग, ऊर्जा का संतुलन (Balancing or energy), ७ चक्रों को charge करना आदि शुरू कर देते हैं. मैंने देखा है, ये आपसी-संबंधों की समस्या में बहुत अच्छा काम करती है. या यु कहें... कि सबसे अच्छा काम करती है. और इसके अलावा हम छोटी छोटी चीज़ों के लिए हीलिंग करते हैं, जैसे साक्षात्कार (Interview) में सफलता या मीटिंग (Meeting) में कामयाबी इत्यादि. 
कृष्णा: अक्सर ये देखा गया है कि जिसे नशे की आदत हो, वो इलाज के बाद फिर से पीने लगता है. आप इसके लिए क्या करती हैं?
मन्नत: नशा निवारण के लिए स्वाधिष्ठान चक्र पर काम किया जाता है. उसमें message feed किया जाता है की नशा करना बुरी बात है. शराब पीना गलत है. तो वो नशा नहीं करता. इसके अलावा उसके अंदर की ऋणात्मक ऊर्जा को समाप्त किया जाता है. और वो ठीक होने के बाद नशा नहीं करता.
कृष्णा: समबन्धों में समस्या का आपके पास कोई केस आया हो, उसके विषय में बताईये.
मन्नत: एक परिवार (Family) में एक पति शराब पीकर अपनी पत्नी से बुरा बर्ताव करता था, पति पत्नी दोनों एक दुसरे से परेशान थे, वो दोनों डिवोर्स लेना चाहते थे. और जब वे मेरे पास आये  तो उनका कहना था कि "हम तो तलाक (Divorce) लेने ही वाले हैं, अब हम साथ नहीं रह सकते, आप हमारे लिए आखिरी चुनाव (Last Option) हैं, आप कोशिश करके देख लीजिये, अगर कुछ हो गया तो अच्छा है." मैंने उनकी हीलिंग की, उन्हें कुछ सुझाव भी दिए और उनके साथ बैठ कर काफी देर तक बात करती, उन्हें समझती, उन्हें समझाती. २ महीने की हीलिंग के बाद अब वो साथ हैं, छुट्टियां मनाने के लिए हांगकांग (Hongkong) गए हैं दोनों एक साथ. ३ दिन बाद आने वाले हैं.  
उनकी बातों से लग रहा था कि वो काफी अनुभवी हैं. काफी साल हो गए थे मन्नत जी को रेकी करते हुए.शायद ६-७ साल से ज्यादा. ऐसा मेरा अंदाज़ा था.
मन्नत: २ साल हो चुके हैं रेकी करते हुए, उससे पहले मैं रेकी के बारे में जानती तो थी. क्योंकि मेरे मामाजी ने २००१ में डॉ. एन. के. शर्मा जी से रेकी सीखी थी. वैसे पहले मेरे दादा जी भी रेकी करते थे लेकिन उस वक्त मुझे पता नहीं था कि ये रेकी है. वो भी छूकर मरीज़ को ठीक कर दिया करते थे. वो तो घडी को हथोड़े से तोड़ कर फिर से जोड़ भी दिया करते थे. मैं भी ऐसा ही कुछ करना चाहती हूँ. करुँगी ज़रूर किसी दिन.
कृष्णा: क्या अपने कभी कोई इस तरह का एक्सपेरिमेंट करके देखा?
मन्नत: जी हाँ !  मैंने खुद एक्सपेरिमेंट किये है, एक तुलसी माता का पौधा था, वो सूख गया था, देख कर ऐसा लगता था कि काफी साल पुराना है, मैंने रेकी की और एक ही बार की हीलिंग में तुलसी माता का वो पौधा हरा-भरा हो गया..., एक और एक्सपेरिमेंट में हमारे  घर की पानी की मोटर ख़राब हो गयी थी, मकेनिक बोला की ख़राब हो गयी है, अब ठीक नहीं हो सकती, ये तो बदलवानी ही पड़ेगी, तो मैंने ३-४ बार हीलिंग की तो वो ठीक हो गयी, चलने लगी. आप खुद करके देखिएगा. अगर आप मुरझाये हुए पौधे को रेकी करेंगे तो वो फिर से हरा-भरा हो जायेगा, 
कृष्णा: तो इसका मतलब रेकी में वहम के अलावा हर चीज़ का इलाज है, क्यूंकि वहम का इलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं था.
मन्नत: जी नहीं... रेकी में वहम का भी इलाज था, मैंने खुद एक औरत को ठीक किया है, उसे वहम था कि उसके पति का किसी के साथ कोई चक्कर है, वो अपने पति को किसी लड़की के साथ भी बात करते हुए देख लेती थी तो उसे अपने पति पर शक होने लगता था कि उसका उस लड़की के साथ चक्कर है. मैंने उसकी हीलिंग की और वो ठीक हो गयी.
कृष्णा: इसका मतलब रेकी में तो बहुत ताकत है, तो क्या कोई रेकी सीख कर इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है?
मन्नत: देखिये रेकी से हम खुद को शुद्ध करते हैं. अपने अंदर की ऋणात्मक शक्तियों को समाप्त करते हैं. हम अपने तन, मन और आत्मा को हर प्रकार से स्वस्थ करते हैं. यही रेकी है. तो फिर जिस व्यक्ति का तन, मन और आत्मा पवित्र और स्वस्थ होगी वो गलत काम के बारे में तो सोच ही नहीं सकता तो, रेकी के गलत इस्तेमाल का सवाल ही नहीं उठता.
कृष्णा: रेकी को लेकर आपकी भविष्य की क्या योजनायें क्या हैं?
मन्नत: मैं अपना एक रेकी सेण्टर खोलना चाहती हूँ. और सिग्दा सीखना चाहती हूँ. सिग्दा एक चीनी ध्यान कला है. देखें कब होता है.
कृष्णा: आपको सबसे ज्यादा ख़ुशी कब होती हैं?
मन्नत: जब पेशंट आके बताता है कि अब हम ठीक हैं, और मुस्कुराता है तो उनकी मुस्कान देखकर हमें भी अपने आप ख़ुशी मिलती है. अच्छा लगता है. (फिर ट्रे मेरी और बढ़ाकर वो बोली) आप बिस्किट, लीजिये आप तो कुछ खा ही नहीं रहे, 
(उसके बाद काफी इधर उधर की बातें हुईं, लेकिन मैं कुछ और जानना चाहता था. और वो ये कि ये रेकी... सीखने वाले की ज़िन्दगी पर कितना असर डालती है... और कहाँ तक. और फिर अंत में वो बोलीं...)
मन्नत: पहले हमारी हालत इनती ख़राब थी की हम कई बार ४-४ ५-५ दिन तक भूखे ही रहते थे. मंदिर गुरुद्वारा ढूँढ़ते थे की कही खाना मिल जाये, मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकती, उस दिन हम ४-५ दिन से भूखे थे, की मुझे रेकी के बारे में पता चला, सुनीता आनंद जी से मिली तो उन्होंने कहा की मुझे पता है तुम रेकी कर लोगी, तुम सीखो रेकी, सब ठीक हो जायेगा, और फीस के बारे में वो बोली की तुम ३,५०० रुपये दे देना, तो मैंने मन में सोचा की यहाँ तो खाने के लाले हैं ये ३,५०० रुपये कहा से लायुंगी, तो वो बोली की चलो तुम सिर्फ १००० दे देना, तो मैं सोचने लगी की नहीं ये नहीं हो पायेगा, रहने दो, छोडो, भूल जाये इससे, तो जब मैं वापिस मुद के आ रही थी तो वो पीछे - से भागी आई, बोली की तुम्हे पैसे देने की ज़रुरत नहीं, मैं तुम्हे डॉ. एन के शर्मा जी से मिलवा दूँगी, तुम रेकी कोर्स कर लो. फिर मैंने उनसे रेकी सीखी और IIIrd लेवल तक उन्होंने मुझसे पैसे नहीं लिए, और जिस दिन मेरा कोर्से ख़तम हुआ, उसी दिनक मुझे एक केस के लिए फ़ोन आ गया, और मुझे काम भी मिल गया और सब ठीक है, 
मन्नत: (और अब वो थोड़ी गंभीर हो चुकी थी. लेकिन मैंने एक बात पैर ध्यान दिया की उनका आत्मविश्वास और दृढ़ता अभी भी कायम थी.) रेकी मेरी लाइफ है, मैं रेकी छोड़ नहीं सकती , शायद ज़िन्दगी के बाद भी न छोड़ पायु. सबसे बड़ी बात है लोगों की दुयाओं में शामिल होना, और वो तो आज है. उससे बड़ा क्या है
ये वाकई सच था.... एक बहुत बड़ा सच. कुछ देर में उनके साथ बैठा और फिर विदा ली. लेकिन मेरे बहुत से सवालों का जवाब मुझे मिल चुका था. और ज़िन्दगी के काफी सारे सवालों के सामने मैं निरुत्तर था. मेरे पास कोई जवाब नहीं था...
रेकी ग्रैंडमास्टर मन्नत राजपूत (Reiki Grandmaster Mannat Rajput)

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