प्राचीन भारतीय युद्ध कलाओं (मार्शल आर्ट) (Ancient Indian Martial Arts) से जुड़े ५ अद्भुत तथ्य,
प्राचीन भारतीय युद्ध कलाओं से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जिनसे लोग अनभिज्ञ हैं। यदि इन रहस्यों की बात भी की जाती है तो कुछ लोगों द्वारा इससे मात्र भ्रम मान लिया जाता है। ऐसे ही कुछ तथ्य यहां आपके सामने हैं।
१. अग्नि पुराण में युद्ध कलाओं (मार्शल आर्ट)का वर्णन
गीता प्रैस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित अग्निपुराण का एक प्रिष्ठ
(A page of Agni Puran, published by Geeta Press, Gorakhpur)
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हिन्दू धर्म के धार्मिक ग्रन्थ अग्नि पुराण के २५२वें अध्याय में भारतीय युद्ध कलाओं (Indian Martial Arts) का वर्णन है। जिन में विभिन्न प्रकार के अस्त्रों एवं शस्त्रों का विवरण तथा उन्हें चलाने की विधि बताई गयी है। साथ ही इसमें मल्ल्युद्ध के दांव पेंचों के विषय में भी बताया गया है।
२. चीन में कुंग-फू की शुरुआत करने वाला था एक भारतीय
चीन में कुंगफू की शुरुआत करने वाला एक भारतीय था. जिसका था बोधिधर्म। पल्लव वंश के राजा सुगंवास का पुत्र बोधीधर्म दक्षिण भारतीय युद्ध कला (South India Martial Art) कल्लरी पयट्टु (Kalaripayattu) में निपुण था। बोधिधर्म को चीन में 'पोती-तमा' के नाम भी पुकारा जाता है।
३. थाईलैंड का मार्शल आर्ट 'मुए थाई' श्री राम भक्त हनुमान जी द्वारा निर्मित
थाईलैंड का राष्ट्रीय खेल 'मुए थाई' (Muay Thai) विश्व का सबसे हिंसक मार्शल आर्ट माना जाता है। 'मुए थाई' से (Muay Thai) जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि 'मुए थाई' (Muay Thai) श्री राम भक्त हनुमान जी द्वारा बनाया गया था। 'मुए थाई' (Muay Thai) में कई प्रहारों के नाम आज भी या तो संस्कृत में हैं या फिर श्री राम भक्त हनुमान जी की कथाओं पर आधारित हैं जैसे 'मुए थाई' (Muay Thai) के एक दांव का नाम है 'हनुमान तवाई व्यान' (Hanuman Tawai Waen),
हिन्दी भाषा में इसका अर्थ है 'हनुमान जी अंगूठी देते हुए'.
४. मर्म कला प्राणघातक भी एवं जीवनदायिनी भी
वैदिक काल से चली आ रही मर्म कला के अन्तर्गत, हमारे शरीर में विद्यमान विभिन्न मर्मस्थानों (Vital Points) को छूकर या उनका मर्दन (मालिश) करके कई रोगों का उपचार किया जाता है . ६ठी शताब्दी ईस्वी पूर्व हुए शल्य चिकित्सक सुश्रुत ने अपनी पुस्तक सुश्रत संहिता में हमारे शरीर में विद्यमान १०७ मर्मस्थानों (Vital Points) का वर्णन किया है . इन मर्म स्थानों पर किए गए प्रहार प्राण भी ले सकते हैं, इसी कारण मर्म शास्त्र का यह विग्यान, 'वर्म कलाई' (Varma Kalai) तथा 'मर्म अदी' (Marma Adi) जैसे प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट में भी पढ़ाया जाता रहा है . इस कला में बिना छुए, मात्र आँखों या उंगलियों के संकेत से भी किसी पर घातक प्रहार किया जा सकता है .
५. ब्रूस ली को पसंद थी डण्ड बैठक
ब्रूस ली द्वारा लिखित पुस्तक 'ताओ ऑफ जीत कुने डो' का एक प्रिष्ठ
A page of the book 'Tao of Jeet Kune Do' by Bruce Lee
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विश्व प्रसिद्ध मार्शल आर्टिस्ट, अभिनेता, दार्शनिक ब्रूस ली (Bruce Lee) का विचार था कि आवश्यकता पड़ने पर हमें किसी भी प्रहार या दांव का प्रयोग कर लेना चाहिए, जो उस समय उचित हो. निरन्तर विकास में विश्वास रखने वाला ब्रूस ली (Bruce Lee) स्वयं भी किसी एक शैली का अन्धभक्त नहीं था. उसे जिस शैली का जो दांव अच्छा लगता अपना लेता तथा लिखकर और चित्रित कर अपने पास संग्रह करके रख लेता. उसके द्वारा संग्रहित इन्हीं लेखों में भारतीय कुश्ती के व्यायाम 'दण्ड' एवं 'बैठक' भी देखने को मिलते हैं. ब्रूस ली के इन्हीं लेखों का संग्रह बाद में 'ताओ ऑफ जीत कुने डो' (Tao of Jeet Kune Do) के नाम से प्रकाशित हुआ.
(5 amazing facts about Ancient Indian Martial Arts)




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