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कुट्टू वेरीसाई: एक प्राचीन दक्षिण भारतीय युद्ध कला

कुट्टू वेरीसाई: एक प्राचीन दक्षिण भारतीय युद्ध कला
प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट की सूची में एक मार्शल आर्ट है कुट्टू वेरीसाई। यह एक दक्षिण भारतीय युद्ध कला है।

यह कला कहां पाई जाती है यदि इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास किया जाए तो यह उत्तर थोड़ा सा जटिल होगा। प्राचीन काल में यह कला दक्षिण भारत से दूसरे कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भी चली गई थी। इस उत्तर के जटिल होने का कारण यह भी है कि दक्षिण भारत में कई प्रकार की युद्ध एवं द्वन्द्व कलाएं पाई जाती है और यह एक दूसरे से कहीं ना कहीं जुड़ी हुई या प्रभावित प्रतीत होती हैं। कभी-कभी यह कह पाना कठिन हो जाता है कि इनमें से कोई कला बिल्कुल अलग अस्तित्व रखती है या किसी दूसरी कला का कोई एक हिस्सा है।

Kuttu Varisai (Kuthuvarisai) Teacher Mr. Rajkumar explaining Techniques to his student


कुट्टू वेरीसाई का इतिहास कुट्टू वेरीसाई का अपना इतिहास है। यह मार्शल आर्ट मलेशिया और इंडोनेशिया में पाए जाने वाले सीलत से काफी मिलता जुलता है। सीलत में जानवरों की नकल की जाती है। ऐसा माना जाता है कि दूसरी शताब्दी में कुट्टू वेरी साई दक्षिण भारत से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में फैल गई थी। चोल वंश, पंड्या वंश और पल्लव वंश में इसे युद्ध कला का फैलना सबसे अधिक माना जाता है। इसकी वजह वे लोग माने जा सकते हैं जो व्यापार के लिए दूसरे देशों में जाते थे या किसी अन्य वजह से वहां जाकर बस जाते थे।

क्या है कुट्टू वेरीसाई
कुट्टू वेरीसाई का अर्थ 2 शब्दों में बटा है। कुट्टू का अर्थ है प्रहार करना तथा वेरीसाई का अर्थ है श्रृंखला यहां क्रम। इस प्रकार कुट्टू वेरीसाई का अर्थ हुआ एक क्रम में प्रहार करना। इस कला में हाथों और पैरों से विभिन्न प्रकार से प्रहार करना तथा प्रकारों को रोकना सिखाया जाता है।

इस युद्ध कला में प्रहार करना तथा रोकना सिखाने से पहले विभिन्न मुद्राओं में घंटो तक खड़ा रहना सिखाया जाता है। इस प्रक्रिया को नेलायगल कहते हैं। नेलायगल योगाभ्यास का ही एक रूप है, जो मानसिक एवं शारीरिक संतुलन तथा शक्ति को बढ़ाने क्या काम करता है।



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