हमारे ऋषि-मुनियों के पास इतनी आलौकिक शक्तियाँ (Supernatural Powers) थीं की वे उनसे चमत्कार कर सकते थे, और वे चमत्कार करते भी थे। किन्तु ये चमत्कार मानव कल्याण मात्र के लिए होते थे। हमारे उन सिद्ध ऋषि-मुनियों की वो सभी आलौकिक परालौकिक शक्तियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी उनके वंशजों या उत्तराधिकारियों को प्राप्त होती रही, और यह स्वाभाविक ही था। किन्तु धीरे धीरे इन शक्तियों का ज्ञान कम होता चला गया। यदि हम इस तथ्य पर ध्यान दें तो हमारे मन में एक प्रश्न उभर कर आता है कि, “क्या वे सभी आलौकिक परालौकिक शक्तियां आज भी हमारे आस पास हैं?”
सोचने पर यह प्रश्न बड़ा रहस्यमयी और रोमांचक लग सकता है, किन्तु इस प्रश्न का उत्तर बहुत ही सरल एवं सीधा है, और उत्तर यह है कि, “हाँ, वो शक्तियां आज भी हम सब में मौजूद हैं।”
वो आलौकिक शक्तियां आज भी हम सब में मौजूद हैं। ये सभी आलौकिक परालौकिक शक्तियां हमारे भीतर विद्यमान तो हैं किन्तु सुप्तावस्था में हैं।
आज हम सब अपने आधुनिक एवं व्यस्त जीवन में पैसा प्यार और भौतिक सुख-सुविधायों के पीछे पड़कर अपनी उस आलौकिक क्षमता और देवी शक्तियों को भूल चुके हैं। हमारे उन शक्तियों के प्रयोग को भूल चुके होने के बावजूद वे शक्तियां अक्सर हमारा मार्गदर्शन करती हैं। हमारे भीतर मौजूद हमारी उन्हीं शक्तियों के कारण हमें कई प्रकार के पूर्वाभास होते हैं। उदाहरण के लिए-
- हमें लगता है की कोई आने वाला है और वो वाकई आ जाता है।
- हम किसी को याद करते हैं तो उसका फ़ोन आ जाता है।
- आपका फ़ोन बजता है तो आप बिना फ़ोन देखे बोल देते हैं की फलां व्यक्ति का फ़ोन होगा, और फ़ोन उठाकर देखते हैं तो फ़ोन उसी का होता है।
इस तरह के कई उदाहरण आपको अपने आसपास मिल जायेंगे। टेलिपैथी (Telepathy), सम्मोहन (Hypnotism) और रेकी (Reiki), इसी प्रकार की शक्तियों के उदाहरण हैं।
रेकी में हम उन्ही आलौकिक शक्तियों के विषय में बताते हैं जिन्हें लेकर हम पैदा हुए थे। हम अपने भीतर सुप्तावस्था में उपस्थित उन्हीं शक्तियों को जागृत करते हैं, और उनके प्रयोग की विधि बताते हैं, कि कैसे हम उन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं और उनसे लाभान्वित हो सकते हैं।
हमारे भीतर कई प्रकार की रोग प्रतिरोधक या रोग निवारण क्षमता होती है। आप देख सकते हैं की अगर किसी व्यक्ति हो चोट लग जाये तो वो दवाई खाए या न खाए, पट्टी करे या न करे उसकी चोट अपने आप ठीक हो जाती है। ये वही ऊर्जा है जिसे हम आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं में Vital Power या रोग प्रतिरोधक क्षमता के नाम से जानते हैं।
साधारणतया जब हम सो रहे होते हैं तो हमारा शरीर ब्रह्माण्ड से प्राण ऊर्जा को प्राप्त करता है और हम स्वस्थ होते हैं। किन्तु सोते समय यह ऊर्जा बहुत कम मात्र में प्राप्त हो पाती है, जिससे हमारा शरीर चलायेमान रहता है तथा हमारे शरीर की छोटी मोती चोटें या दोष दूर होते रहते हैं, किन्तु सोना तो एक सिमित समय के लिए ही हो पता है। उस सिमित समय में पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त नहीं हो पाती। रेकी में रेकी चिकित्सक (Reiki Healer) इस प्राण ऊर्जा को अपने शरीर से दुसरे के शरीर में भेजते हैं ताकि उसकी समस्या का शीघ्र हॉल हो जाये। अब यह समस्या चाहे मानसिक हो, शारीरिक हो या आत्मिक, रेकी प्राण ऊर्जा उस समस्या को हल कर ही देती है।
अब इसका सार हम ये कह सकते हैं कि रेकी चिकित्सक, ब्रह्माण्ड से रेकी प्राण ऊर्जा को अपने शरीर में आमंत्रित करता है, एकत्र करता है तथा रोगी व्यक्ति के रोगी हिस्से पर प्रभाव डाल कर उसे रोग मुक्त कर देता है। वह रोग या समस्या जो स्वयं बिना प्रयास किये तीन हफ्ते में ठीक होनी थी अब चार दिन में ठीक हो जाती है। यही रेकी है।
द्वारा: डॉ. विकास दुग्गल
द्वारा: डॉ. विकास दुग्गल


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